श्री चित्रगुप्त महाराज





श्री चित्रगुप्त महाराज

दोस्तों  आज हम श्री चित्रगुप्त महाराज के बारे में बताएंगे चित्रगुप्त महाराज जी यमराज जी के  सहायक देव है चित्रगुप्त जी की उत्पत्ति कहां से हुई शायद कई लोग जानते भी होंगे शायद कई लोग नहीं भी जानते होंगे तो सुनिए एक बार ब्रह्मा जी  के पास सभी देवता गण आए और विनती करी  की है देव एक सृष्टि की रचना करिए जिसमें मनुष्य  जीव जंतु पेड़ पौधे वनस्पति फल सभी कुछ व्याप्त हो तो ब्रह्मा जी ने एक सृष्टि तैयार कर दी जिसे हम पृथ्वी कहते हैं ब्रह्मा जी ने सृष्टि तो बना दी  मगर उनको चिंता हुई  कि मैंने सृष्टि तो बना दी मगर इसका संचालन कैसे हो जितनी भी चीजें मैंने इस पृथ्वी पर बनाई है उनका अंत भी होना जरूरी है  और दोबारा जन्म होना भी जरूरी है और इसके साथ साथ उन सभी का लेखा-जोखा भी होना जरूरी है तभी ब्रह्मा विष्णु महेश तीनों देवताओं ने मिलकर निर्णय लिया की यमराज जी को यह कार्यभार सौंपा जाए जिससे पृथ्वी का संतुलन बना रहे अब यमराज जी को बुलाया गया उन्हें कार्य के बारे में बताया गया तब यमराज जी बोले कि प्रभु  आपने मुझे इस लायक समझा मैं उसके लिए  आपका आभारी हूं परंतु मैं अकेला  इस कार्य को करने में असमर्थ हूं  कृपया कर मुझे कोई सहयोगी दीजिए जो बुद्धिमान हो सर्वश्रेष्ठ हो और ज्ञानी हो  तभी ब्रह्माजी बोले ठीक है आपको आपके सहयोग के लिए अवश्य प्रदान करूंगा और ब्रह्मा जी ध्यान में चले गए कुछ वर्षों पश्चात जब ब्रह्मा जी ध्यान से वापस लौटे तो एक सज्जन को अपने सम्मुख  देख पूछ बैठे आप कौन हैं उन सज्जन के हाथ में  कलम और दबात थी वह सज्जन बोले प्रभु मैं आपका अंश हू आप ही से प्रकट हुआ हूं तब ब्रह्माजी बोले आप को एक अति महत्वपूर्ण कार्य करना है ब्रह्मा जी ने पूरी बात उनको बताई और कहा हे सज्जन क्योंकि आप मुझसे जन्मे हो इसलिए मैं आपका नामकरण करता हूं और उन्होंने उन सज्जन को श्री चित्रगुप्त महाराज के नाम से संबोधित किया और उन्हें यमलोक जाने को कहा तभी से श्री चित्रगुप्त महाराज सभी प्राणियों का पूरा लेखा-जोखा रखते हैं चित्रगुप्त जी महाराज की दो पत्नियां थी प्रथम पत्नी का नाम शोभावती एवं द्वितीय पत्नी का नाम नंदिनी था शोभावती जी  से  8 पुत्र रत्न एवं नंदनी जी से 4 पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई वह सभी पुत्र पृथ्वी पर आकर बस गया उन बारह पुत्रों का नाम इस प्रकार है  

1. श्रीवास्तव  
2.  माथुर 
3.  कुलश्रेष्ठ  
4.  निगम  
5 . भटनागर  
6. अस्थाना  
7. सक्सेना
8. बाल्मीक
9. सूरध्वज
10. कर्ण
11. अम्बष्ट
12. गौड़

श्री चित्रगुप्त महाराज के कुछ मंत्र भी बताए गए हैं जो कि इस प्रकार है

श्री चित्रगुप्त जी का मूल मंत्र

ॐ श्री चित्रगुप्ताय नमः

श्री चित्रगुप्त प्रार्थना मंत्र:

मसिभाजनसंयुक्तं ध्यायेत्तं च महाबलम्
लेखिनीपट्टिकाहस्तं चित्रगुप्तं नमाम्यहम्

श्री चित्रगुप्त जी की आरती

ॐ जय चित्रगुप्त हरे, स्वामी जय चित्रगुप्त हरे।
भक्त जनों के इच्छित, फल को पूर्ण करे॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

विघ्न विनाशक मंगलकर्ता, सन्तन सुखदायी।
भक्तन के प्रतिपालक, त्रिभुवन यश छायी॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

रूप चतुर्भुज, श्यामल मूरति, पीताम्बर राजै।
मातु इरावती, दक्षिणा, वाम अङ्ग साजै॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

कष्ट निवारण, दुष्ट संहारण, प्रभु अन्तर्यामी।
सृष्टि संहारण, जन दु:ख हारण, प्रकट हुये स्वामी॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

कलम, दवात, शङ्ख, पत्रिका, कर में अति सोहै।
वैजयन्ती वनमाला, त्रिभुवन मन मोहै॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

सिंहासन का कार्य सम्भाला, ब्रह्मा हर्षाये।
तैंतीस कोटि देवता, चरणन में धाये॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

नृपति सौदास, भीष्म पितामह, याद तुम्हें कीन्हा।
वेगि विलम्ब न लायो, इच्छित फल दीन्हा॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

दारा, सुत, भगिनी, सब अपने स्वास्थ के कर्ता।
जाऊँ कहाँ शरण में किसकी, तुम तज मैं भर्ता॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

बन्धु, पिता तुम स्वामी, शरण गहूँ किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

जो जन चित्रगुप्त जी की आरती, प्रेम सहित गावैं।
चौरासी से निश्चित छूटैं, इच्छित फल पावैं॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥

न्यायाधीश बैकुण्ठ निवासी, पाप पुण्य लिखते।
हम हैं शरण तिहारी, आस न दूजी करते॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥







English Translation

Shri Chitragupta Maharaj Friends, today we will tell about Shri Chitragupta Maharaj Chitragupta Maharaj ji is the assistant god of Yamraj ji. Where did Chitragupta originate from? Probably many people may or may not even know many people, so listen to Lord Brahma once God has come and begged to create a creation in which human beings, animals, trees, plants, vegetation, fruits are all pervasive, so Brahma Ji created a world, which we call Earth, Brahma Ji created the universe, but he was worried that I have created the world, but how to manage it. All the things that I have created on this earth must also be finished and must be reborn and along with them, it is necessary to keep an account of all of them, only then Brahma Vishnu Mahesh Together the three gods decided that Yamraj ji should be entrusted with this task, so that the balance of the earth was maintained, now Yamraj ji was called and he was told about the work, then Yamraj ji said, "Lord, you thought me worthy, I am thankful to you" But i am unable to do this work alone Please do give me a colleague who is wise and best known only then Brahmaji said, I will definitely provide you for your support and after a few years Brahma ji went to meditation, after a few years when Brahma ji returned from meditation, a gentleman in front of me Seeing who you are sitting there was a pen and pressing in the hand of that gentleman, the gentleman said, Lord, I am your part of myself, then Brahmaji said that you have to do a very important work, Brahma Ji told the whole thing to him and said Sajjan, because you were born to me, I name you and he addressed that gentleman by the name of Shri Chitragupta Maharaj and asked him to go to Yamalok, since then Shri Chitragupta Maharaj keeps a complete account of all beings. Wives were first wife's name Shobhavati and second wife's name was Nandini, 8 sons from Shobhavati ji and 4 sons from Nandini ji received Ratna. All those sons came to Earth and settled those twelve sons. 1. Srivastava 2. Mathur 3. Best 4. Corporation 5. Bhatnagar 6. Asthana 7. Saxena 8. Balmik 9. Surdhwaj 10. Karna 11. Ambush 12. Gaur Some mantras of Shri Chitragupta Maharaj are also mentioned which are as follows Basic mantra of Shri Chitragupta Om Shri Chitragupta Shri Chitragupta Prayer Mantra: Masibhajan Samyukta Dhyanayant F Mahabalam Lekhinipattikahastam chitraguptaam namamyaham Aarti of Shri Chitragupta ॐ Jai Chitragupta Hare, Swami Jai Chitragupta Hare. Complete the desired fruit of the devotees. ॐ Jai Chitragupta Hare ... Destroyer of destroyers, son of happiness Prophet of Devotion, Tribhuvan Yash Chhay ॐ Jai Chitragupta Hare ... Roop Chaturbhuj, Shyamal Murti, Pitamber Rajai. Matu Iravati, Dakshina, Left Ang Sajai ॐ Jai Chitragupta Hare ... Trouble prevention, evil codification, Lord Antaryami. Srishti Sanharan, mass sadness, Swami appeared ॐ Jai Chitragupta Hare ... There is immense interest in pen, dawat, shell, magazine, tax. Vaijayanti Vanmala, Tribhuvan Man Mohai ॐ Jai Chitragupta Hare ... Brahma Harshaye, who took charge of the throne. Thirty-three categories of gods, enshrined in Charan. ॐ Jai Chitragupta Hare ... Nriapati Saudas, Bhishma Pitamah, remember you. Do not delay, bring the desired fruit ॐ Jai Chitragupta Hare ... Dara, Sut, Bhagini, all doers of their health. Where should I go in the shelter, you accept me ॐ Jai Chitragupta Hare ... Brother, father, you are the master, whose refuge is the jewel. Do not leave me without waiting ॐ Jai Chitragupta Hare ... Aarti of Jan Chitragupta, the village with love. Eighty-four have been left free from the Chaurasi; ॐ Jai Chitragupta Hare ... Judge Baikuntha resident, writes sin virtue. We are refuge Tihari, do not do it. ॐ Jai Chitragupta Hare ...


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